भोपाल का नया मास्टर प्लान, यानी भोपाल विकास योजना-2047, ड्रॉफ्ट के रूप में सामने आ चुका है और शहर का कारोबारी जगत इसे लेकर उत्साहित है। शनिवार को शहर के अलग-अलग व्यापारी संघों और व्यावसायिक संगठनों के प्रतिनिधि मुख्यमंत्री निवास पहुंचे और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का स्वागत-अभिनंदन कर आभार जताया। प्रतिनिधियों का कहना था कि शहर के लिए मास्टर प्लान इस समय की सबसे बड़ी जरूरत थी, जिसे सरकार ने पूरा किया है।
यहां यह साफ समझना जरूरी है कि जो दस्तावेज सामने आया है, वह ड्रॉफ्ट है — यानी प्रस्तावित योजना। फाइनल मास्टर प्लान अभी जारी होना बाकी है। ड्रॉफ्ट चरण का मतलब ही यही होता है कि प्रस्ताव सार्वजनिक चर्चा और सुझावों के लिए सामने रखा गया है।
कौन-कौन से संगठन पहुंचे
जिलाध्यक्ष श्री रविन्द्र यति के नेतृत्व में पहुंचे इस समूह में मध्यप्रदेश की रीयल एस्टेट से जुड़ी संस्था क्रेडाई की भोपाल इकाई, चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज की भोपाल इकाई, कोलार व्यापारी महासंघ, कोलार का सर्राफा व्यापारी संघ, न्यू मार्केट व्यापारी संघ और संत हिरदाराम नगर (बैरागढ़) व्यापारी संघ शामिल रहे। अलग-अलग व्यवसायों के प्रमुख संघों और संगठनों से जुड़े करीब 100 से अधिक प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री का अभिनंदन किया।
प्रतिनिधियों ने कहा कि शहर के विकास में सहयोगी और सहभागी बनने का जो अवसर सरकार ने उन्हें दिया है, उस पर वे खरा उतरने का प्रयास करेंगे। यह बात मास्टर प्लान की उस प्रक्रिया की ओर इशारा करती है, जिसमें कारोबारी संगठनों को भी हितधारक माना जा रहा है।
व्यापारियों की एक मांग
मुलाकात के दौरान व्यापारियों ने मुख्यमंत्री के सामने एक मांग भी रखी। उनका कहना था कि यदि अगले साल होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट से पहले फाइनल मास्टर प्लान जारी हो जाए, तो यह शहर के लिए कहीं बेहतर रहेगा। यह अभी मांग है — इस पर कोई घोषणा या समय-सीमा रिलीज में दर्ज नहीं है।
योजना का घोषित उद्देश्य
इसी संदर्भ में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर लिखा कि भोपाल विकास योजना-2047 का उद्देश्य भोपाल को हरित, समृद्ध और समावेशी शहर के रूप में विकसित करना है। उनके अनुसार सरकार इस ड्रॉफ्ट को शहर के सभी जनप्रतिनिधियों, व्यापारियों, नागरिकों और अधिकारियों के साथ मिल-बैठकर, परस्पर सहयोग और समन्वय से धरातल पर उतारेगी।
भोपाल के दुकानदारों, बिल्डरों और आम नागरिकों के लिए इसका व्यावहारिक मतलब यह है कि शहर की आगे की भू-उपयोग और विकास दिशा अभी प्रस्ताव के स्तर पर है। ड्रॉफ्ट पर सुझाव देने का यही चरण होता है — फाइनल योजना आने के बाद बदलाव की गुंजाइश कम रह जाती है।


