ग्वालियर जिले के निकोड़ी गांव में सीमित कृषि भूमि वाले परिवार की उषा रावत ने नर्सरी को आमदनी का स्थायी जरिया बनाया है। सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार, करीब 4 लाख रुपये की लागत से संचालित नर्सरी से उन्होंने सालाना लगभग 10 लाख रुपये की आय और 6 लाख रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया है।
भितरवार विकासखंड निवासी उषा का परिवार पहले पूरी तरह खेती पर निर्भर था। कम जमीन के कारण घरेलू खर्च और बच्चों की पढ़ाई की जिम्मेदारी संभालना कठिन हो रहा था, जिसके बाद उन्होंने उद्यानिकी से जुड़ा काम अपनाया।
प्रशिक्षण से सीखी पौध तैयार करने की वैज्ञानिक विधि
उषा ने आत्मा योजना के अंतर्गत नर्सरी प्रबंधन का प्रशिक्षण लिया। इसमें बीज उपचार, खेती की तैयारी, बुवाई, सिंचाई, पोषक तत्व प्रबंधन तथा कीट और रोग नियंत्रण की वैज्ञानिक विधियां सिखाई गईं।
प्रशिक्षण के बाद उन्होंने सब्जियों, फूलों और अन्य उपयोगी पौधों की स्वस्थ पौध तैयार करना शुरू किया। आसपास के किसानों के बीच मांग बढ़ने से नर्सरी परिवार की नियमित आय का स्रोत बन गई।
आय बढ़ी तो बच्चों की पढ़ाई को मिला सहारा
नर्सरी की आय से परिवार की आर्थिक स्थिति और बच्चों की पढ़ाई को सहारा मिला है। उनकी बड़ी बेटी बीए के बाद एमएसडब्ल्यू कर रही है, बेटा बीए में पढ़ रहा है और छोटी बेटी कृषि विज्ञान विषय के साथ कक्षा 12वीं की छात्रा है।
उषा अब परिवार की आर्थिक गतिविधियों और कृषि संबंधी फैसलों में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं। विज्ञप्ति में बताया गया है कि उनकी सफलता से आसपास के किसान भी पौध उत्पादन और आधुनिक तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं।


