मूक-बधिर बच्चों से बात करने के लिए जिस भाषा की जरूरत पड़ती है, उसे स्कूल और दफ्तर में कितने लोग जानते हैं — यही सवाल जबलपुर के प्रगत शैक्षणिक अध्ययन संस्थान में हुई एक दिवसीय कार्यशाला के केंद्र में रहा। संस्थान के समावेशी शिक्षा प्रकोष्ठ के तत्वावधान में हुए इस जागरूकता सेमिनार और प्रशिक्षण कार्यक्रम में सांकेतिक भाषा के व्यावहारिक प्रयोग पर काम कराया गया। आयोजन दो सत्रों में पूरा हुआ।
कार्यशाला में शिक्षक, प्रशिक्षणार्थी और सामान्य नागरिक बड़ी संख्या में मौजूद रहे। संवाद सत्रों का संचालन विशेष अनुवादक सुश्री सोहनी ठाकुर ने किया, जिससे मंच पर होने वाली बात प्रतिभागियों तक सांकेतिक भाषा में भी पहुंचती रही।
पहला सत्र: 'यह सिर्फ संवाद का माध्यम नहीं'
प्रथम सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में निगमायुक्त श्री रामप्रकाश अहिरवार शामिल हुए। उन्होंने कहा कि सांकेतिक भाषा केवल मूक-बधिर समुदाय का संवाद माध्यम नहीं है, बल्कि यह संवेदनशीलता और समावेशी समाज की पहचान है। उनका आशय यही था कि इसे सीखना दूसरों पर एहसान नहीं, समाज की अपनी जरूरत है।
दूसरा सत्र: जिला पंचायत का भरोसा
द्वितीय सत्र में जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती आशा मुकेश गोंटिया ने दिव्यांगजनों के सर्वांगीण विकास को प्राथमिकता बताया। उन्होंने आश्वस्त किया कि जिला पंचायत उनके सहयोग और कल्याण के लिए सदैव तत्पर है। यह एक आश्वासन है, इसके तहत कोई अलग योजना या राशि कार्यशाला में घोषित नहीं की गई।
विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद जिला पंचायत सदस्य श्री राजेश ठाकुर ने कहा कि समावेशी शिक्षा को धरातल पर उतारने के लिए लगातार प्रयास किए जाएंगे।
मांग: कक्षा में सामान्य बने सांकेतिक भाषा
संभागीय समावेशी शिक्षा प्रभारी डॉ. रामनरेश पटेल और प्रभारी प्राचार्य डॉ. संजीव अग्रवाल ने शिक्षण संस्थानों में सांकेतिक भाषा के सामान्यीकरण पर जोर दिया। दोनों का कहना था कि जब यह भाषा कक्षा में आम हो जाएगी, तो बच्चे हीनभावना से मुक्त होकर समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकेंगे।
व्यावहारिक स्तर पर इसका मतलब यह है कि सांकेतिक भाषा का प्रशिक्षण सिर्फ विशेष शिक्षकों तक सीमित न रहे। कार्यशाला में शामिल शिक्षकों और प्रशिक्षणार्थियों को इसी दिशा में बुनियादी अभ्यास कराया गया।
जबलपुर में समावेशी शिक्षा से जुड़े ऐसे प्रशिक्षण संस्थान का समावेशी शिक्षा प्रकोष्ठ समय-समय पर आयोजन करता है। जिन शिक्षकों या अभिभावकों को सांकेतिक भाषा का प्रशिक्षण चाहिए, वे प्रगत शैक्षणिक अध्ययन संस्थान के समावेशी शिक्षा प्रकोष्ठ से आगामी कार्यक्रमों की जानकारी ले सकते हैं।


