मैहर नगर के वार्ड क्रमांक 10 में रहने वाली श्रीमती नंगमा बी के घर में बेटी की पढ़ाई को लेकर अब पहले जैसी चिंता नहीं है। लाड़ली लक्ष्मी योजना में दर्ज उनकी बेटी को 21 वर्ष की आयु पूरी होने पर 1 लाख 43 हजार रुपये की सहायता राशि मिलेगी। यह राशि योजना की शर्तें पूरी होने पर दी जाती है, यानी अभी यह तय हकदारी है और भुगतान तय उम्र पर होगा।

नंगमा बी बताती हैं कि इस योजना ने बेटी की शिक्षा और भविष्य को लेकर परिवार का भरोसा बढ़ाया है। उनके मुताबिक आर्थिक सहयोग की जानकारी भर से घर में यह तय हो गया कि बेटी की पढ़ाई बीच में नहीं रुकेगी।

पढ़ाई के हर पड़ाव पर किस्त

योजना का ढांचा एकमुश्त रकम तक सीमित नहीं है। बेटी को कक्षा 6 में प्रवेश के समय 2 हजार रुपये की सहायता मिल चुकी है। कक्षा 9 में प्रवेश पर 4 हजार रुपये की राशि मिलेगी। यानी बड़ी रकम का इंतजार करते हुए भी परिवार को बीच-बीच में छोटी मदद मिलती रहती है।

परिवार का कहना है कि यही किस्तें व्यावहारिक रूप से सबसे ज्यादा काम आती हैं, क्योंकि नए दाखिले के वक्त किताब, यूनिफॉर्म और फीस का खर्च एक साथ सामने आता है। इस आर्थिक सहयोग से बेटी की पढ़ाई आगे बढ़ाने में मदद मिल रही है।

योजना का मकसद

लाड़ली लक्ष्मी योजना बेटियों की शिक्षा, सुरक्षा और बेहतर भविष्य को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से चलाई जा रही है। मैहर का यह मामला दिखाता है कि योजना कागज पर दर्ज एक वादे से आगे बढ़कर परिवारों के लिए आर्थिक संबल का माध्यम बन रही है।

नंगमा बी ने बेटी के उज्ज्वल भविष्य के लिए चलाई जा रही इस योजना के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रति आभार जताया है। जिन परिवारों में बेटी का नाम अभी योजना में दर्ज नहीं है, वे नजदीकी आंगनवाड़ी केंद्र या लोक सेवा केंद्र से पंजीयन की प्रक्रिया की जानकारी ले सकते हैं।