कभी-कभी समय पर की गई एक छोटी-सी पहचान किसी बच्चे के पूरे जीवन की दिशा बदल देती है। ग्राम जोहद, विकासखंड नटेरन निवासी मेघा अहिरवार, पिता श्री नरेश अहिरवार की कहानी भी ऐसी ही एक प्रेरणादायी कहानी है, जहां आंगनवाड़ी केन्द्र में हुई स्वास्थ्य स्क्रीनिंग से उसकी श्रवण संबंधी समस्या की पहचान हुई और समय पर उपचार मिलने से उसके बेहतर भविष्य की नई उम्मीद जगी।

आंगनवाड़ी में हुई समस्या की पहचान

मेघा के लिए वह दिन सामान्य दिनों की तरह ही था, जब राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आर.बी.एस.के.) नटेरन की टीम आंगनवाड़ी केन्द्र पर बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण एवं स्क्रीनिंग के लिए पहुंची। स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान टीम ने मेघा में श्रवण संबंधी समस्या ( Deafness) की पहचान की।

आर.बी.एस.के. टीम ने बच्ची की समस्या को गंभीरता से लेते हुए उसे आगे की जांच एवं विशेषज्ञ परामर्श के लिए जिला शीघ्र हस्तक्षेप केन्द्र ( DEIC) रेफर किया। यह समय पर हुई पहचान मेघा के उपचार की दिशा में पहला महत्वपूर्ण कदम साबित हुई।

विशेषज्ञ जांच के बाद सामने आया उपचार का विकल्प

DEIC में आवश्यक जांच एवं विशेषज्ञ मूल्यांकन के बाद मेघा की श्रवण संबंधी समस्या का विस्तृत परीक्षण किया गया। विशेषज्ञों द्वारा बच्ची के लिए Cochlear Implant की आवश्यकता बताई गई। परिवार को उपचार के उपलब्ध विकल्पों के संबंध में आवश्यक जानकारी एवं परामर्श प्रदान किया गया।

परिवार ने उपलब्ध विकल्पों में से अपनी पसंद के अनुसार हजेला हॉस्पिटल, भोपाल का चयन किया।

स्क्रीनिंग से उपचार तक स्वास्थ्य विभाग ने निभाई जिम्मेदारी

मेघा के उपचार की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में आर.बी.एस.के. एवं DEIC की टीम द्वारा आवश्यक रेफरल, दस्तावेजी प्रक्रिया, समन्वय तथा उपचार संबंधी आवश्यक कार्यवाहियां पूरी की गईं। स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा बच्ची और उसके परिवार को उपचार की प्रक्रिया में आवश्यक मार्गदर्शन एवं सहयोग प्रदान किया गया।

इन सतत प्रयासों का सुखद परिणाम 26 अगस्त 2026 को सामने आया, जब हजेला हॉस्पिटल, भोपाल में मेघा का सफल Cochlear Implant किया गया।

अब बेहतर भविष्य की ओर बढ़ रही मेघा

मेघा की कहानी केवल एक सफल उपचार की कहानी नहीं है। यह समय पर स्वास्थ्य स्क्रीनिंग, संवेदनशीलता, परिवार के सहयोग और स्वास्थ्य विभाग के समन्वित प्रयासों की कहानी है।

आंगनवाड़ी केन्द्र में हुई एक सामान्य-सी स्वास्थ्य जांच ने मेघा की समस्या को समय रहते सामने ला दिया। इसके बाद आर.बी.एस.के. से DEIC और DEIC से विशेषज्ञ उपचार तक स्वास्थ्य व्यवस्था ने मेघा का साथ दिया। आज सफल उपचार के बाद मेघा के परिवार के लिए उसके बेहतर भविष्य की उम्मीद पहले से कहीं अधिक मजबूत हुई है।

मेघा की सफलता यह संदेश देती है कि बच्चों की नियमित स्वास्थ्य स्क्रीनिंग और समय पर पहचान गंभीर समस्याओं के उपचार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।