भोपाल के गौहर महल की कहानी उसके इस्तेमाल में छिपी है। जिस परिसर में रियासत का दरबार और रहने की जगह थी, वहाँ हस्तशिल्प की खरीदारी और मेले भी जगह पाते हैं। बड़े तालाब के किनारे खड़ा महल शहर की रोजमर्रा की आवाजाही से इस तरह जुड़ा हुआ है।

मध्यप्रदेश पर्यटन की जानकारी में यहाँ सरकारी मृगनयनी एम्पोरियम और नियमित अंतराल पर लगने वाले शिल्प मेलों का उल्लेख है। उसकी पुस्तक ‘डिस्कवरिंग मध्यप्रदेश’ भी पुराने दरबारी आँगनों के हस्तशिल्प बाजार के रूप में इस्तेमाल को दर्ज करती है। हर दिन मेला होने का अर्थ इससे नहीं निकलता।

एक आँगन से दूसरे तक

महल का संबंध कुदसिया बेगम, जिन्हें गौहर बेगम भी कहा जाता था, से है। परिसर में दीवान-ए-आम और दीवान-ए-खास के आँगन, आवासीय हिस्से और दूसरे भवन शामिल थे। एक हिस्से से दूसरे तक जाने वाले रास्ते बताते हैं कि पूरा परिसर कई तरह के कामों के लिए बनाया गया था।

बनावट में छोटी चीजें गौर करने लायक हैं: दोहरे खंभों पर टिकती मेहराबें, दरवाजों की फूल-पत्ती और ऊपर के हिस्सों के सजावटी सहारे। पर्यटन पुस्तक इनमें मुगल, राजपूत और स्थानीय शैलियों का मेल बताती है। निर्माण में पत्थर और लकड़ी के साथ लखौरी ईंटें, चूना और ईंट का चूरा भी इस्तेमाल हुआ।

शहर में दूसरे महल बनने के बाद गौहर महल सरकारी दफ्तरों के काम भी आया। दरबार, दफ्तर और शिल्प बाजार—इसके आँगनों का यह बदलता इस्तेमाल भोपाल की कहानी को एक ही परिसर में जोड़ता है। यहाँ इमारत देखते समय यह भी सोचिए कि उसके बरामदे और खुले चौक अलग-अलग दौर में किस काम आए होंगे।

मुख्य बातें

  • गौहर महल बड़े तालाब के किनारे है और कुदसिया बेगम से जुड़ा है।
  • दीवान-ए-आम और दीवान-ए-खास के आँगन इसकी बनावट का अहम हिस्सा हैं।
  • पर्यटन विभाग यहाँ मृगनयनी एम्पोरियम और हस्तशिल्प मेलों का उल्लेख करता है।

स्रोत और संदर्भ

  1. मध्यप्रदेश पर्यटन · Gohar Mahal — Bhopal destination guide ↗प्रकाशन-तिथि उपलब्ध नहीं
  2. मध्यप्रदेश पर्यटन · Discovering Madhya Pradesh — Gauhar Mahal, मुद्रित पृष्ठ 365–366 ↗प्रकाशन-तिथि उपलब्ध नहीं

सार्वजनिक प्राथमिक स्रोतों पर आधारित संपादित लेख। स्रोत जाँच: 15 सितंबर 2026।

यह खबर शेयर करें